हरियाणा – देश में गन्ने का सर्वाधिक भाव हरियाणा में दिया जा रहा है । इस बार भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश के किसानों को गन्ने के भाव में 12 रूपये की बढोतरी कर 362 रूपये प्रति किवंटल देने का निर्णय लिया है । जोकि न केवल पंजाब से अधिक है बल्कि पूरे देश में सर्वाधिक हो गया है।

यह जानकारी आज हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने सहकारिता मंत्री डाॅ बनवारी लाल की उपस्थित में गन्ना नियंत्रण बोर्ड की बैठक के उपरांत पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि यह बढौतरी मुख्यमंत्री द्वारा इस बात को ध्यान में रखकर की गई है ताकि हमारे राज्य के किसानों के हितों को बरकरार रखा जा सके ।

दलाल ने कहा कि बैठक में गन्ना किसानों व मिलों की स्थिति, चीनी के भाव और अन्य विषयों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि लिए गए निर्णय के अनुसार अब गन्ने की अगेती किस्म के लिए 362 रूपए प्रति क्विंटल व पछैती किस्म के लिए 355 रूपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाएगा जोकि पहले 340 रूपए प्रति क्विंटल था।

उन्होंने कहा कि पिछले साल के सभी निजी व सहकारी चीनी मिलों की रिकवरी गन्ने की क्वालिटी कमजोर रहने की वजह से 0.34 घटी है इस बार जो रिकवरी आई है 10.58 से घटकर 10.24 आई है। उन्होंने कहा कि बुआई की जा रही गन्ने की इस किस्म के अंदर यह महसूस किया गया कि आज जो बीज चल रहे है जीसी किस्म 0238 में कुछ बिमारिया भी आ रही है। इसलिए केंद्र व एचएयू के वैज्ञानिकों से चर्चा करने के उपरंात कृषि वैज्ञानिकों ने एक नई किस्म 15023 विकसित की है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में बुआई की जा रही गन्ने की किस्म से सामान्यतः 10.50 प्रतिशत के आस-पास चीनी की रिकवरी आती है, जबकि विकसित की गई 15023 नई गन्ने की किस्म की रिकवरी 14 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद जताई जा रही है। श्री दलाल ने कहा कि जल्द से इस किस्म को किसानों तक पहुचांने का काम किया जाएगा जिससे यह संभावना भी बन रही है कि चीनी का उत्पादन 30 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नई किस्म के आने से किसानों के साथ- साथ शुगर मिल व सरकार को भी लाभ मिलेगा।

इसी प्रकार  दलाल ने वैज्ञानिकों के अच्छे कार्य को देखते हुए कहा कि कृषि विभाग वैज्ञानिकों को अधिक से अधिक नई किस्म के गन्ने के बीज का उत्पादन करने के लिए जल्द ही जमीन भी उपलब्ध कराएगा ताकि इस नई किस्म के बीज को जल्दी से जल्दी किसानों के पास पहुचाया जा सकें।

उन्होंने कहा कि इस बार सभी चीनी मिलों को नवंबर के प्रथम सप्ताह में संचालित करने के लिए निर्देश दिए गए हैं ताकि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी फसल को समय पर पिराई किया जा सके। उन्होने कहा कि शुगर मिल जल्दी चलने से किसानों को अधिक लाभ मिलेगा जिससे कि किसान अपनी अगामी फसल की बुआई कर सकेेंगे।

उन्होंने कहा इस बार सभी शुगर मिल को पिछले साल से जयादा गन्ना आंबटित किया जाएगा और किसी भी शुगर मिल की मात्रा कम नही की जाएगाी। कृषि मंत्री ने कहा कि हरियाणा गन्ना उत्पादन मे अच्छा राज्य है और प्रदेश की एक शुगर मिल नारायणगढ को छोडकर बाकी सभी चीनी मिलों का भुगतान शत प्रतिशत कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार समय पर गन्ना किसानों की पैमेंट करवाने के लिए प्रयत्नशील रहती और समय पर भुगतान भी कराती है।

दलाल ने कहा कि किसानों की गन्ना फसल की अदायगी को लंबित न रखते हुए शायद हरियाणा एक ऐसा प्रदेश होगा जो अपने बजट से किसानों की फसल का भुगतान करता है और इसी दिशा में मिलों को घाटे से उभारने के लिए पिछले साल 192 करोड रूपए की सब्सिडी प्रदान की गई है।

उन्होंनें पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब में पिछले 4 सालों से गन्ने का भाव 310 रूपये था लेकिन पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पंजाब की सरकार ने इस बार 50 रूपये प्रति किंवटल गन्ने का भाव बढा दिया है।

इसी प्रकार, उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल किसान हितेषी फैसले लेकर फसलों के भाव बढाकर किसानों को मजबूत करने का काम किया हैं।  दलाल ने कहा कि प्रदेश की मंडिया मजबूत है और किसानों के खातों में फसल की सीधी पेमेंट प्रदेश सरकार द्वारा करवाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश से ज्यादा किसान हितैषी नीतियां किसी भी पडोसी राज्य की नहीं है। किसानों के हित में नीतिगत फैसले लिए जाते है चाहे माइक्रो इरीगेशन, सूक्ष्म सिंचाई व फसल बीमा योजना हो। हरियाणा में एशिया की सर्वश्रेष्ट मंडी जोकि सबसे बडी मंडी गन्नोर में स्थापित की जा रही है। इसी प्रकार सेब मार्किट पिजौर में, फूल मार्किट गुरूग्राम में और आधुनिक मसाला मार्किट सोनीपत में बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को कृषि यंत्र खरीदने पर हर साल 200 करोड रूगए की सबसिडी मुहैया करवाती है।

इससे पूर्व, बैठक के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा सहकारिता मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि चीनी मिलों को घाटे से उभारने के लिए विकल्पों की तलाश की जाए और एथोनाॅल के प्लांट भी संबंधित मिलों में जल्द से जल्द स्थापित किए जाएं। इसी प्रकार, जिन चीनी मिलों में गुड व शक्कर का उत्पादन किया जा सकता हैं उनमें इन उत्पादों को भी ज्यादा से ज्यादा तैयार किया जाए। इसी प्रकार, बैठक में विभिन्न गन्ना किसानों के समस्याओं का निराकरण भी किया गया और संबंधित अधिकारियांे को निर्देश दिए गए।

 

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