हरियाणा (रुद्रा राजेश सिंह कुंडू)- मानसून ने भारत में दस्तक दे दी है। तीन-चार दिन से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण मौसम में नमी बनी रहती है। मौसम में रहने वाली नमी हेल्थ के लिए हानिकारक भी हो सकती है। बारिश के मौसम में स्किन से जुड़ी बीमारियां, श्वास से जुड़ी बीमारियां समेत कई तरह की बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी बनी रहती है जिससे कई चीजों में इन्फेक्शन होने का खतरा बना रहता है।नमी वाले मौसम में खाने की चीजों को लेकर काफी ध्यान देने की जरुरत है। क्योंकि कई फूड प्रोडेक्ट ऐसे है जिनमें फंगस लगने का खतरा रहता है जो कि शरीर के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।

बारिश के मौसम में इन जीचों को खाने से करें परहेज

दूध– कहा जाता है कि बरसात के मौसम में दूध नहीं  पीना चाहिए क्योंकि सावन के महीने में शिव जी के उपर इसे चढ़ाया जाता है। हालांकि ये सब तो अंधविश्वास की चीजें हैं लेकिन वास्तविक कारण ये है कि बारिश के मौसम में गायों और पशुओं को खिलाया जाने वाला चारा बैक्टीरिया और कीटाणुओं से भरा होता है जिसके कारण दूध भी पूरा शुद्ध नहीं आता है। इसी खतरे को देखते हुए बरसात के मौसम में दूध के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है।

बैंगन– बैंगन भी बारिश के मौसम में न खाने की सलाह दी जाती है। बैंगन के भरते को लोग काफी पसंद करते हैं लेकिन बरसात के मौसम में बैंगन में कीड़े होने के संभावना रहती है जो आपके स्वास्थ्य को खराब कर सकती है।

तला भूना – बरसात के मौसम में लोग चाय के साथ पकौड़े खाना बहुत पसंद करते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में तली भूनी हुई चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए। क्योंकि तली भूनी चीजें खाने से इन्फेकशन होने खतरा बढ़ जाता है। खासकर बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे डायरिया का खतरा बढ़ जाता है।

नॉनवेज– बरसात के मौसम में जिस प्रकार पालक और दूध में कीटाणु और बैक्टीरिया के होने का खतरा होता है उसी प्रकार के नॉनवेज में भी जैसे कि मीट, मांस-मछली में भी बैक्टीरिया और हानिकारक कीटनाशकों का खतरा बढ़ जाता है। इसके सेवन से फूड एलर्जी भी हो सकती है।

पालक– बरसात के मौसम में पालक में कीटाणु, वायरस और बैक्टीरिया के होने का खतरा बढ़ जाता है। ये कीटाणु बैक्टीरिया नगण्य आंखों से तो नहीं नजर आते हैं लेकिन ये आपके स्वास्थ्य को खराब करने के लिए काफीहोते हैं। पालक की खेती में हानिकारक कीटनाशक का भी प्रयोग किया जाता है जिसका असर भी धूप की कमी के कारण कम नहीं होता है और अंत में ये हमें बीमार बना देता है।

 

 

 

 

 

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