चरखी-दादरी (रेणु)- गांव बास में शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचने पर चारों तरफ हवाओं में बस एक ही आवाज सुनाई दे रही थी कि जब तक सूरज-चांद रहेगा शहीद भूपेंद्र सिंह का नाम रहेगा. इसी नारे के साथ गांव के लोगों ने अपने आंसूओं को रोकने की कोशिश की और हजारों की संख्या में शहीद के अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़ गए.

कम उम्र में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हरियाणा के लाल भूपेंद्र सिंह को अंतिम विदाई दे दी गई है. बारामुला में नौगांव हरदोई सेक्टर चौकी पर शनिवार को पाकिस्तान ने मोर्टार बम फेंक कर हमला किया था जिसमें भूंपेद्र सिंह शहीद हो गए थे. बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर गांव बास पहुंचा जहां पर उन्हें अंतिम विदाई दी गई.

गांव बास के लाल भूपेंद्र सिंह अठारह साल के थे तभी सेना में भर्ती हो गए थे और पांच साल देश की सेवा करने के बाद अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. जानकारी के मुताबिक डेढ़ साल पहले ही भूपेंद्र सिंह की शादी हुई थी और उनका सात महीने का बच्चा भी है. शहीद का छोटा भाई भी सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है. छोटे भाई ने दीपक कुमार ने कहा कि अब मैं सच्ची लगन और मेहनत  से सेना भर्ती के लिए तैयारी करूंगा और अपने भाई की शहादत का बदला लूंगा. शहीद के भाई ने बताया कि भूपेंद्र सिंह हमेशा कहते थे देश से बड़ा कुछ नहीं है और देश की सेवा करना ही हमारा परम कर्तव्य है. उन्हीं से प्ररेणा पाकर मैं सेना में भर्ती होना चाहता हूं.

 

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