कविता बिश्नोई,गुड़गांव।

नेहरू स्टेडियम में बने बास्केटबॉल कोर्ट की 1 महीने की प्रैक्टिस में ही स्थिति खराब होने लगी है। मार्च माह में यह कोर्ट बनकर तैयार हुआ था। लॉकडाउन के चलते शुरुआत में यहां पर प्रैक्टिस नहीं हो पाई। जिसके बाद लॉकडाउन खुलने के बाद करीब 1 माह से यहां पर प्रैक्टिस जारी है। चंद समय की प्रैक्टिस ने ही ग्राउंड की पोल खोल दी है। ग्राउंड में जगह-जगह पर दरारें और छोटे-छोटे गड्ढे हो गए हैं।अगर खिलाड़ियों की प्रैक्टिस यहां पर जारी रही तो खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा भी बना रहेगा।

दरअसल, मार्च 2020 में नेहरू स्टेडियम के तीन खेलों के लिए कोर्ट पूर्व जिला खेल अधिकारी राज यादव द्वारा 29 लाख के बजट में तैयार करवाए गए।   जिसमें ताइक्वांडो और वुशु के लिए टीन शेड लगाकर बड़ा हॉल बनाया। ताकि एक साथ यहां पर दोनों ही खेल की खिलाड़ी प्रैक्टिस कर सकें। 26 फीट चौड़ा और 60 फीट लंबाई वाला हॉल बनाया गया है, जिसमें दोनों खेलों के खिलाड़ी प्रशिक्षण ले सकेंगे। लेकिन हाल ठीक से न बने होने के कारण अब यहां पर पानी टपकने लगा है। जिस वजह से यहां रखा प्रैक्टिस का सामान खराब होने की स्थिति में आ गया है।

बास्केटबॉल कोच ने बताया कि यह ग्राउंड सिंथेटिक नहीं है। इसमें सीमेंट और पेंट की लियर बिछाई गई है। जिसमें दरारें आ गई हैं। अगर किसी भी खिलाड़ी का इस दरार में पैर खेलते हुए पड़ता है तो वह गिर सकता है। अगर यह ग्राउंड सिंथेटिक होता तो इस तरह की दरार नहीं आती। क्योंकि सिंथेटिक ग्राउंड 5 से 6 इंच ऊंचा होता है।हम जबकि पेंट की लियर बहुत पतली है। सिंथेटिक ट्रैक पर गिरने से खिलाड़ी के चोटिल होने की संभावना बहुत कम रहती है।

 

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