हरियाणा (रश्मि बाल्यान)- कोरोना पीड़ित लोगों में ब्लैक और व्हाइट फंगस को लेकर काफी डर था। लगभग कोरोना पीड़ित ब्लैक और व्हाइट फंगस का शिकार हुए थे। इसके बाद अब एक अजीब किस्म का फंगस सामने आया है जो रीढ़ की हड्डिया गला रहा है। ये फंगल इन्फेक्शन रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। इस फंगल से संक्रमित 4 से पांच लोग महाराष्ट्र में मिल चुके हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद इस फंगस के मामले सामने आए हैं। आपको बताते हैं ये नई किस्म का फंगस क्या है और किस तरह से स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

एक 66 साल के व्यक्ति कोरोना से पीड़ित हुए उसके बाद वह पूरी तरह से ठीक हो गए। करीब एक महीने बाद उन्हें बुखार हुआ । बुखार के साथ पीठ के नीचले हिस्से में दर्द हुआ। शुरुआत में मसल्स में होने वाला दर्द समझकर पेन कीलर लेते रहे।डॉक्टर की सलाह से उन्होंने नॉन स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेंट्री ड्रग्स के डोज भी दिए लेकिन उसे राहत नहीं मिली।

अंग्रेजी न्यूजपेपर द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार एमआरआई से पता चला कि उस व्यक्ति रीढ़ की हड्डी के पास खाली जगह पर इंफेक्शन है। इस इंफेक्शन के चलते रीढ़ की हड्डी को नुकसान हो चुका है। हड्डी की बायोप्सी और कल्चर टेस्ट से पता चला कि ये सब इन्फेकशन एस्परगिलस स्पेसीज की वजह से हुआ है। मेडिकल साइंस में इसे एक गंभीर इंफेक्शन माना जाता है। इसके बाद सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसका पता लगाना भी बहुत मुश्किल है।

मेडिकल टर्म में एस्परगिलस ऑस्टियो माइलाइटिस कहा जाता है। इस अक्रामक फंगल इन्फेक्शन का इलाज करना बहुत मुश्किल है क्योंकि ये रीढ़ की हड्डी में होता है। इस तरह का फंगल इन्फेक्शन पहली बार कोरोना मरीजों में पाया गया है।

कोरोना की दूसरी लहर के बाद ठीक हुए मरीजों में ब्लैक फंगस का इंफेक्शन तेजी से देखने को मिला था। ये फंगस के कारण से होता है। इस फंगस का नाम म्यूकर है। हालांकि म्यूकोमरकोसिस कोई नई बिमारी नहीं है लेकिन कोरोना मरीजों में ये तेजी से देखा जा रहा है। डॉक्टर का कहना है कि ये फंगस इसलिए फैला है क्योंकि कोरोना मरीजों को इलाज के लिए दिए जा रहे स्टेरॉयड्स से शुगर लेवल बढ़ा रहे थे। साथ ही कुछ दवाइंयो की वजह से इम्यूनिटी भी कम हो गई थी।

Share this post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *