पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की 108 वी जयंती पर जून में होने वाली इनेलो की रैली को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। इसका आयोजन पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली इंडियन नेशनल लोकदल कर रही है। चौटाला रैली में मुख्य वक्ता रहेंगे। देश में गैर भाजपा कांग्रेस की राजनीति करने वाले दिग्गज नेता पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा, पंजाब के पूर्व सीएम सरदार प्रकाश सिंह बादल, जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव, जनता दल के प्रधान महासचिव केसी त्यागी, टीएमसी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा सहित चौधरी चरण सिंह के पुत्र व राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी भी इस रैली में शामिल होंगे।

रैली के लिए चौटाला ने जहां हरियाणा के सभी जिला मुख्यालयों पर खुद जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं को निमंत्रित किया वहीं इन दिग्गज नेताओं से भी मुलाकात की। चौटाला ने मुलायम के बाद जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की तो राजनीति लक्ष्य भी सामने आया असल में चौटाला बीजेपी कांग्रेस के सामने देश की राजनीति में तीसरा मोर्चा गठित करना चाहते हैं। चौटाला को इसके लिए प्राथमिक तौर पर सहमति भी मिल गई है।

प्रदेश की राजनीतिक राजधानी माना जाता है जींद
जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी माना जाता है कभी सियासत रही जींद के राजा का संदेश भी यहां से संगरूर तक फैली सियासत के निवासियों तक पहुंचता था।  चौधरी देवीलाल ने जब 1985 में राजीव लोंगोवाल समझौते के खिलाफ हरियाणा में न्याय युद्ध की घोषणा जींद रैली से ही की थी। इसके बाद पूर्व सीएम बंसीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी जींद से ही अपने राजनीतिक एजेंडे घोषित किए।  वहीं इनेलो से निष्कासित होने के बाद 9 दिसंबर 2018 को जींद की धरती पर बड़ी रैली करके नए झंडे के साथ जननायक जनता पार्टी का भी गठन किया गया था। विधानसभा चुनाव में मात्र 11 महीने पुरानी जेजेपी 10 सीटें जीतकर किंग मेकर की भूमिका में हरियाणा में आई थी।

हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके ओम प्रकाश चौटाला की अगर बात करें तो वह खुद अपने परिवार को राजनीतिक रूप से एक नहीं रख सके। चौटाला के दोनों बेटे अभय और अजय सिंह अलग-अलग दलों की राजनीति कर रहे हैं। बिहार से जनता दल यूनाइटेड की बात करें तो पिछले कुछ सालों के अंतराल में अगर देखा जाए तो जेडीयू लगातार कमजोर हुआ है। जीतन राम मांझी जेडीयू से अलग हुए तो रामविलास पासवान की लोजपा भी अलग हो गई। बिहार में भले ही जनता दल यूनाइटेड की सीटें भाजपा से कमाई लेकिन वहां भाजपा ने बड़प्पन दिखाते हुए नीतीश कुमार को ही सत्ता सौंपी। दूसरी तरफ वहीं जेडीयू और भाजपा के विरुद्ध तीसरे मोर्चे के गठन की बात कर रहा है।

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