हरियाणा (सुनीता कागड़ा)- देश के नेताओं को अपनी सरकार द्वारा बनाए गए सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं है। नेता आम जनता को इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल का हवाला देते है। मगर खुद सरकारी अस्पताल का रुख तक नहीं करते है। कोरोना महामारी के दौरान जहां प्रदेश भर में सरकार प्लाजमा बैंक व लैब का निर्माण करवा रही है। वहीं अपनी सेहत को लेकर नेता सरकारी अस्पतालों पर भरोसा नहीं करते। बड़े नेता सरकारी अस्पतालों में जाने की बजाय अपना इलाज इस महंगे अस्पताल में करवाते हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को कोरोना हुआ तो वो खुद सरकारी अस्पताल में दाखिल होने की बजाय इस महंगे अस्पताल में पहुंचे हैं। ये अस्पताल है गुरुग्राम का मेदांता द मेडिसिटी। देश के दिग्गज नेता इसी अस्पताल में अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। इतना ही नहीं विदेशों से भी लोग यहां पर इलाज करवाने के लिए आते हैं।

हरियाणा की आर्थिक राजधानी साइबर सिटी गुरुग्राम का ये अस्पताल आम जनता के बजट से बाहर है। आम लोगों का यहां इलाज करा पाना संभव नहीं है। इस अस्पताल में या तो बड़े नेता या फिर बड़े अधिकारी ही इलाज करवाने के लिए आते है।

जब स्वास्थ्य की बात आती है तो सारे नेता जनता को सरकारी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह देते हैं। पर नेताओं की सेहत पर बात आ जाए तो नेता प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाते है। आम जनता की जान सरकारी अस्पताल के भरोसे है।

 

 

 

 

 

 

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