नई दिल्ली(सुमन सैनी) – कोरोना महामारी के चलते सरकार ने सभी प्रकार के सामूहिक कार्यक्रमों पर रोक लगा रखी है। जितने भी महत्वपूर्ण बैठक होती है सभी वर्चुअल माध्य से करवाई जा रही ताकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसी के चलते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कोरोना के कारण खिलाड़ियों के लिए ऑनलाइन राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शानदार प्रदर्शन करने वाले देश के खिलाड़यों को सालाना राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इस साल 74 खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिये चुना गया, जिसमें 5 को खेल रत्न और 27 को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।

इनमें से 60 खिलाड़ियों ने भारतीय खेल प्राधिकरण के 11 केंद्रों से वर्चुअल समारोह में हिस्सा लिया। हालंकि कई  खिलाड़ी इस समारोह में शामिल नहीं हो पाए। राष्ट्रपति ने भाग लेने वाले पुरस्कार विजेताओं की प्रशंसा की, जिनके नाम पुकारे गये और उनकी उपलब्धियों बतायी गयीं। हालांकि राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल की कमी महसूस हुई, जहां यह समारोह आयोजित किया जाता है। खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने समारोह शुरू होने से पहले कहा कि कोविड-19 के दौरान यह पहला पुरस्कार समारोह है जिसमें राष्ट्रपति उपस्थित हुए हैं।

 इस साल खिलाड़ियों के नकद पुरस्कारों की राशि में बढ़ोतरी की गयी है। शनिवार सुबह खेल रत्न की पुरस्कार राशि को 25 लाख रुपये तक बढ़ा दिया गया, जो पहले 7.5 लाख रुपये थी। अर्जुन पुरस्कार हासिल करने के लिये समारोह में 22 खिलाड़ी ऑनलाइन हुए, उन्हें 15 लाख रुपये दिये गये, जो राशि पहले की तुलना में 10 लाख रुपये अधिक है। द्रोणाचार्य (आजीवन) पुरस्कारों की राशि पहले पांच लाख हुआ करती थी जिसे 15 लाख रुपये कर दिया है। वहीं नियमित द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं को 10 लाख रुपये प्रदान किये गये जो पहले पांच लाख रुपये होती थी। ध्यानचंद्र पुरस्कार विजेताओं को पांच लाख के बजाय 10 लाख रुपये दिये गये।

कोविड-19 के कड़े प्रोटोकॉल के कारण पुरस्कार के 44 साल के इतिहास में पहली बार हुआ जब विजेता, मेहमान और गणमान्य लोग दरबार हॉल में इकट्ठा नहीं हो सके।  इस वर्ष ध्यानचंद पुरस्कार 15 कोचों को दिया गया है। केंद्रों पर स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधित सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। बल्कि पुरस्कार विजेता पीपीई किट पहने दिखे। खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रत्येक पुरस्कार विजेता को केंद्र में आने से पहले कोविड-19 जांच से गुजरना था।

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