दिल्ली(रुद्रा राजेश सिंह कुंडू) -आम आदमी के लिए राहत भरी खबर है। पेट्रोल-डीजल के दाम में गिरावट नहीं आई लेकिन खाने के तेलों के दाम कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। त्योहारों के सीजन में आम आदमी को इससे काफी राहत मिल सकती है। बता दें कि केंद्र सरकार ने कच्चे रोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर लगने वाला आयात शुल्क को छह महीने के लिए खत्म कर दिया है। क्रूड पाम ऑयल पर लगने वाला एग्री सेस का भी बीस प्रतिशत कम करके 7.5 प्रतिशत कर दिया है। कच्चा सोया और सुरजमुखी पर सेस 5 प्रतिशत कर दिया है।

एक अधिसूचना में में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने कहा है कि शुल्क में कटौती 14 अक्टूबर से शुरु होकर 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगी। यानि की अलगे साल 31 मार्च, 2022 तक इन पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगा। वहीं रिफाइंड सोया और सुरजमुखी के तेल पर आयात शुल्क जारी रहेगा।  इस कटौती के बाद कच्चे पाम पर 8.25 प्रतिशत, सोयाबीन पर 5.5 प्रतिशत और सूरजमुखी ऑयल पर 5.5 फीसद प्रभावी शुल्क होगा। सरकारी निर्देश के अनुसार खाद्य ऑयल अब केवल कच्चे पाम ऑयल पर 7.5 फीसद कृषि अवसंरचना विकास उपकर लगेगा। जबकि क्रुड सोयाबीन ऑयल और क्रूड सनफ्लावर ऑयल के लिए यह दर 5 प्रतिशत होगी।

इसके अलावा पामोलिन, सनफ्लावर, सोयाबीन और पाम तेल की रिफाइंड मूल्यों पर आयात शुल्क 32% से घटाकर 17% कर दिया है। आने के बाद आने वाले दिनों में सरकार के इस फैसले से खाद्य तेल के दामों में गिरावट हो सकती है। घरेलू बाजार में सरसों के तेल की दाम बढ़ जाने पर अगस्त में दोबारा ग्रुप सरसों का तेल आयात शुरू हुआ है और पिछले दिनों पिछले 2 महीनों में 32 हजार 5 सौ टन तेल का आयात हुआ है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निर्देशक बी वी मेहता ने बताया कि घरेलू बाजार और फेस्टीवल मौसम में खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार ने खाद्य तेलों का आयात शुल्क घटा दिया है।

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